हमारे विभाग

युवा परिषद

धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज का शौर्य

हिन्दू युवाओं में शौर्य, अनुशासन और धर्म रक्षा का संकल्प जगाने हेतु समर्पित हिन्दवी स्वराज्य सेना युवा परिषद। अखाड़ा परंपरा और राष्ट्र सेवा।

युवा परिषद के बारे में

प्रखर राष्ट्रवाद एवं धर्म रक्षा हेतु युवाओं का वज्र-संकल्प

धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के अदम्य साहस और बलिदान से प्रेरित युवा परिषद, भारत के प्रत्येक युवा को अधर्म के विरुद्ध सजग, अनुशासित और जिम्मेदार बनाने के लिए तत्पर है।

नशा, सांस्कृतिक भटकाव और वैचारिक गुलामी को त्यागकर सनातन धर्म और राष्ट्र की रक्षा हेतु युवाओं को संगठित करना हमारा परम लक्ष्य है। युवा शक्ति को शौर्य, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव से जोड़कर एक जागरूक एवं सक्षम युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में कार्य करना युवा परिषद का संकल्प है।

“अन्याय का प्रतिकार, धर्म का विस्तार!”युवा परिषद • हिन्दू युवा संगठन • हिन्दवी स्वराज्य सेना • धर्मवीर संभाजी महाराज • अखाड़ा संस्कृति • धर्म रक्षक युवा

युवा परिषद प्रमुख

प्रमुख का नाम शीघ्र घोषित किया जाएगा

प्रमुख का नाम शीघ्र घोषित किया जाएगा

युवा परिषद प्रमुख — हिन्दवी स्वराज्य सेना

युवा परिषद के प्रमुख का विस्तृत परिचय, सामाजिक एवं संगठनात्मक अनुभव तथा दायित्व की जानकारी आधिकारिक जानकारी प्राप्त होने के बाद अपडेट की जाएगी।

अनुभव एवं भूमिका
वास्तविक प्रमुख की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर यह अनुभाग अपडेट किया जाएगा।
प्रमुख उपलब्धियाँ
आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर अपडेट किया जाएगा।
संगठनात्मक भूमिका
युवा परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप युवा गतिविधियों, सेवा कार्यों, अनुशासन एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों के संचालन और समन्वय में मार्गदर्शन।

हमारे उद्देश्य

युवा परिषद के प्रमुख उद्देश्य

युवा शक्ति को शौर्य, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव से जोड़कर एक जागरूक एवं सक्षम युवा पीढ़ी का निर्माण करना।

  • अखाड़ा परंपरा व शारीरिक सौष्ठव

    नगर-नगर और ग्राम-ग्राम में अखाड़ों और व्यायामशालाओं का पुनरुद्धार कर बलवान और तेजस्वी युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में कार्य करना।

  • धर्म-ध्वज व उत्सव रक्षण

    हिन्दू पर्व-त्योहारों, शोभायात्राओं और धार्मिक आयोजनों की शुचिता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुशासित युवा सहभागिता को बढ़ावा देना।

  • आपातकालीन धर्म रक्षक दल

    प्राकृतिक आपदा हो या समाज पर कोई संकट, सेवा और सुरक्षा हेतु सर्वप्रथम आगे आने वाली अनुशासित युवा वाहिनी के निर्माण की दिशा में कार्य करना।

  • शारीरिक विकास

    अखाड़ा परंपरा, व्यायामशालाओं और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ एवं सक्षम बनाने की दिशा में कार्य।

  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता

    हिन्दू पर्व-त्योहारों, शोभायात्राओं एवं धार्मिक आयोजनों में अनुशासित युवा सहभागिता को बढ़ावा देना।

  • सेवा एवं आपातकालीन सहयोग

    प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक संकट की परिस्थितियों में सेवा एवं सहायता के लिए युवाओं को संगठित एवं तैयार करना।

हमारे साथ जुड़ें

राष्ट्रसेवा और युवा शक्ति के इस संकल्प का हिस्सा बनें

यदि आपके भीतर शौर्य, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना है, तो युवा परिषद से जुड़कर संगठनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में अपना योगदान दें।