हमारे विभाग
खेल परिषद
बल संवर्धन • पारंपरिक युद्धकला • क्रीड़ा
पारंपरिक भारतीय खेलों, अखाड़ा संस्कृति और युद्धकलाओं के पुनरुद्धार हेतु हिन्दवी स्वराज्य सेना की खेल परिषद। बलवान युवा, समर्थ राष्ट्र और सनातन शौर्य।
खेल परिषद के बारे में
बल संवर्धन, शौर्य और पारंपरिक क्रीड़ा परंपरा का पुनर्जागरण
सनातन दर्शन में शरीर को धर्म पालन का सबसे पहला और अनिवार्य माध्यम माना गया है। स्वामी विवेकानंद ने भी युवाओं के शारीरिक विकास और खेल-कूद के महत्व पर बल दिया था।
आज पाश्चात्य संस्कृति और स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता के कारण हमारी युवा पीढ़ी शारीरिक और मानसिक रूप से शिथिल हो रही है। हिन्दवी स्वराज्य सेना की खेल परिषद का उद्देश्य भारत की गौरवशाली अखाड़ा परंपरा, पारंपरिक युद्धकलाओं और स्वदेशी खेलों को पुनर्जीवित कर युवाओं में शारीरिक क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास करना है।
“शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् | वज्र देह, धर्म रक्षक!”
खेल परिषद प्रमुख

श्री कमल ठाकुर
खेल परिषद प्रमुख — हिन्दवी स्वराज्य सेना
श्री कमल ठाकुर पारंपरिक भारतीय कुश्ती और अखाड़ा संस्कृति से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2003 से 2012 तक उन्होंने इंदौर की प्रसिद्ध श्री विजयबहादुर गुरु व्यायामशाला में कुश्ती के गुर और दांव-पेच सीखे तथा अनुभवी प्रशिक्षकों एवं पहलवानों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
सन् 2003 से 2012 तक प्रसिद्ध श्री विजयबहादुर गुरु व्यायामशाला, इंदौर में कुश्ती के गुर और दांव-पेच सीखे। अखाड़े के ख़लीफ़ा श्री भोला काका तथा अंतरराष्ट्रीय पहलवान एवं ओलंपियन श्री पप्पू यादव जी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया। महान भारत केसरी एवं हिन्द केसरी श्री रोहित पटेल (लड्डू पहलवान) के साथ भी कुश्ती का गहन प्रशिक्षण एवं निरंतर सानिध्य प्राप्त हुआ।
इंदौर नगर एवं संपूर्ण मध्यप्रदेश के कई प्रतिष्ठित दंगलों, केसरी कुश्ती प्रतियोगिताओं एवं टूर्नामेंटों में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
सामाजिक संकल्प एवं भविष्य का विज़न
अखाड़े से राष्ट्रीय स्तर तक युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना
इंदौर जिले के ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को, जिनके पास प्रतिभा तो है लेकिन आर्थिक संसाधन सीमित हैं, हिन्दवी स्वराज्य सेना के बैनर तले निःशुल्क मार्गदर्शन, डाइट सहयोग एवं उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का संकल्प है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के होनहार बाल पहलवानों को तराशकर उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेने योग्य बनाना, ताकि वे देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
स्वदेशी खेलों का पुनरुद्धार
कबड्डी, खो-खो, मलखंब और पारंपरिक कुश्ती की प्रतियोगिताओं का जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजन करना, ताकि युवाओं में अनुशासन, सामूहिकता और खेल भावना विकसित हो।
अखाड़ा संस्कृति एवं फिटनेस आंदोलन
ग्राम और नगर स्तर पर व्यायामशालाओं और अखाड़ों को आधुनिक साधनों के साथ पुनर्जीवित करना तथा युवाओं को नशे, भटकाव और अस्वस्थ जीवनशैली से दूर कर स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन के लिए प्रेरित करना।
हिन्दू खिलाड़ियों को संबल एवं सम्मान
ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े होनहार खिलाड़ियों को खेल उपकरण, पौष्टिक आहार और प्रशिक्षण हेतु प्रायोजन एवं मंच उपलब्ध कराना।
हमारे साथ जुड़ें
पारंपरिक खेलों और युवा शक्ति के इस अभियान का हिस्सा बनें
आइए, पारंपरिक भारतीय खेलों, अखाड़ा संस्कृति और स्वदेशी क्रीड़ा परंपराओं को पुनर्जीवित करने के इस अभियान से जुड़ें। युवाओं में शारीरिक क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए खेल परिषद के साथ आगे बढ़ें।










