हमारे विभाग
धर्मस्व परिषद
मंदिर संरक्षण • वेद संवर्धन • गोसेवा
मठ-मंदिरों की शुचिता, तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता, गोशालाओं का संरक्षण और संतों के आशीर्वाद से धर्म सत्ता की पुनर्स्थापना हेतु समर्पित धर्मस्व परिषद।
धर्मस्व परिषद के बारे में
सनातन धर्म सत्ता, तीर्थ और देवस्थानों का पुनरुद्धार । मंदिर, तीर्थ, गोसेवा और वेद परंपरा के संरक्षण का संकल्प
हमारे मंदिर और तीर्थ केवल पूजा स्थल नहीं, अपितु हिन्दू समाज की शक्ति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। धर्मस्व परिषद पूज्य संतों, धर्माचार्यों, पुजारियों और वेद-विद्वानों के मार्गदर्शन में सनातन परंपराओं, गोमाता और देवस्थानों के जीर्णोद्धार एवं स्वायत्तता हेतु समर्पित है।
धर्मस्व परिषद का उद्देश्य मठ-मंदिरों की शुचिता, तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता, गोशालाओं के संरक्षण तथा वेद परंपरा के संवर्धन के माध्यम से सनातन धर्म की परंपराओं को सशक्त बनाना है।
“धर्मो रक्षति रक्षितः | तीर्थों की पवित्रता, मंदिरों की भव्यता।”मंदिर जीर्णोद्धार • सनातन संस्कृति रक्षा • गोसेवा • तीर्थ संरक्षण • संत समन्वय • वेद पाठशाला
धर्मस्व परिषद प्रमुख

श्री श्री 1008 महंत राजनाथ योगी
राष्ट्रीय धर्माचार्य अध्यक्ष — नाथ सम्प्रदाय
महंत राजनाथ योगी जी नाथ सम्प्रदाय की परंपरा, धर्म एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। सरल स्वभाव एवं सरल जीवन जीने वाले संत के रूप में वे धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
“गुरु: ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत योगी अवैद्यनाथ महाराज जी, गोरक्षनाथ मंदिर पीठाधीश्वर”
वंश परंपरा एवं गादी दायित्व
महंत राजनाथ योगी जी जन्म एवं कर्म से योगी वंशावली की परंपरा से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2004 में सर्वसम्मति से घोषणा की गई तथा बड़े गुरु के देहांत के पश्चात वर्ष 2017 में गादीपति के रूप में दायित्व संभाला। वर्ष 2019 में महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 बने। नाथ सम्प्रदाय की परंपरा, धर्म एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। सरल स्वभाव एवं सरल जीवन जीने वाले संत के रूप में धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। सरल स्वभाव, सरल जीवन एवं संत परंपरा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व। नाथ सम्प्रदाय की गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन धर्म, हिन्दू संस्कृति एवं धार्मिक
प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक दायित्व
नाथ सम्प्रदाय — राष्ट्रीय धर्माचार्य अध्यक्ष मालवांचल राजगुरु नाथ योगी समाज — प्रदेश अध्यक्ष विश्व हिन्दू महासंघ — राष्ट्रीय धर्माचार्य अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी — मध्य प्रदेश प्रभारी स्वदेशी सनातन संघ — मध्य प्रदेश प्रभारी अध्यक्ष हिन्दू सनातन वाहिनी — प्रदेश अध्यक्ष संत समाज आर्यावर्त षट्दर्शन संत मंडल भारत — संगठन मंत्री नाथ समाज — राष्ट्रीय धर्माचार्य अध्यक्ष 12 आसन जीवित समाधि परंपरा — संबंधित धार्मिक दायित्व महामंडलेश्वर — श्री श्री 1008
मठ एवं धार्मिक क्षेत्र
महंत राजनाथ योगी जी के धार्मिक दायित्व एवं मठ-मंदिरों से संबंध इंदौर, रतलाम, धार, बड़नगर, भाटपचलाना, कमेड, खरसोद, औरडी, सिनोद, नोगाँव, बड़गाँव, गरडावद, जिरोता (राजस्थान), करौली माता, उत्तर प्रदेश एवं गोरखपुर सहित अनेक स्थानों पर हैं। वे अनेक मठ-मंदिरों के मठाधीश के रूप में धार्मिक परंपराओं एवं संत समाज से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
हमारे उद्देश्य
धर्मस्व परिषद के प्रमुख उद्देश्य
मंदिर, तीर्थ, गोसेवा और वेद परंपरा के संरक्षण के माध्यम से सनातन संस्कृति को सशक्त बनाना।
- मंदिर जीर्णोद्धार व संरक्षण
उपेक्षित, खंडहर या आक्रांताओं द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए प्राचीन मंदिरों की खोज, पुनर्निर्माण और नित्य पूजा-अर्चना शुरू करवाना।
- तीर्थ क्षेत्र मर्यादा रक्षा
सनातन तीर्थों — काशी, मथुरा, अयोध्या, हरिद्वार आदि — की परिधि में मांसाहार, मद्यपान और अपवित्र आचरण पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु जन-जागरण।
- गोसेवा एवं वेद पाठशाला संवर्धन
निराश्रित गोवंश के लिए स्वावलंबी गोशालाओं का निर्माण, पंचगव्य उत्पादों का प्रचार और वेद पाठी ब्राह्मणों व छात्रों को सहयोग।










